Date of Sermon Delivery: 23. April. 2023
Place of sermon Delivery: Delhi, India
Sunday Worship Service
Speaker: Brother. Ashish
Title - Be obedient and grow in God's grace.
Bible- 1 peter 5:1-11.
Key verse - 1 Pete 5:6.
सभी कों जय मसीह की। मै आप सभी का स्वागत करता हुँ इस कलीसिया मे। मै विश्वास करता हुँ की बीते हुए समय मे आप लोग परमेश्वर के साथ विश्वासयोग्य रहे होंगे। और अपने दिनों मे परमेश्वर कों प्रथम स्थान देने वाले रहे होंगे। जब हम परमेश्वर की सहभागिता मे बने रहते हैं और उसके आज्ञाकारी रहते हैं तो वो हमें अपनी सामर्थ देता हैं की हम अपने दुःखो मे भी दृढ़ता के साथ बने रहते हैं। हम चाहे उम्र के किसी भी पड़ाव मे हो परमेश्वर की हमसे कुछ अपेक्षा हैं।वो हमारे जीवन से कुछ चाहता हैं और वह बाते हमारी हानि की नहीं हैं परन्तु परमेश्वर चाहता हैं की हम स्थिर रहे और आत्मिकता मे बढ़े। स्थिरता का मतलब हैं जब हम अपने जीवन कों जी रहे होते हैं तब जीवन मे होने वाली वह नेगेटिव बाते जो हमें अंदर से हिला देती हैं और जीवन कों निराशा मे बदल देती हैं। चाहे वह हमारे बड़े भाइयों के द्वारा हमें मिलती हैं या कभी कभी हमारे छोटे भाई - बहनो के द्वारा हम उन बातों कों सुनते हैं। उन बातों से परमेश्वर हमें सँभालते हैं। और भटकने नहीं देते हैं बल्कि अपनी नजदीकी मे और ज्यादा ले लेते हैं। और हम अपने जीवन मे स्थिरता कों महसुस करते हैं। यह परमेश्वर की ओर से होता हैं इसलिए हर विश्वासी कों चाहिए की वह परमेश्वर से प्रार्थना करें की परमेश्वर मुझे अपनी वह आत्मा दीजिये जो मुझे मेरे जीवन के मुश्किल दिनों मे बनाये। मै जीवन मे आने वाले उतार-चढाव के कारण विश्वास मे घट नहीं जाऊ इसलिए मुझे अपनी स्थिरता की आत्मा दीजिये।
आमीन।
चलिए आज के वचनों मे चलते हैं। 1 पतरस 5:1-11 मे पतरस कुछ ख़ास बातों कों लोगों तक पहुँचता हैं। उसके यह वचन लिखने का ख़ास कारण हैं की कलीसिया मे लोगों के बीच मे प्रेम बना रहे और वह परमेश्वर की नज़दीकी मे अपनी जिम्मेदारी कों निभाने वाले हो सके। पतरस वचनों कों शुरू करते हुए प्राचीनों कों समझाता हैं और बताता हैं की मै भी प्राचीन हूँ और मसीह के दुःखो का गवाह भी हुँ और भविष्य मे प्रकट होने वाली मसीह की महिमा का सहभागि हुँ। पतरस प्राचीनों कों समझता हैं की जो तुम्हारे मध्य मे लोग हैं वह परमेश्वर के झुंड हैं उनकी रखवाली करों।
अभी कुछ समय पहले यीशु नें पतरस कों एक आज्ञा दी थीं यूहन्ना 22:15-27 यीशु पतरस कों कहते हैं की मेरी भेड़ो की रखवाली कर और उन्हें चरा।
और अब इस क़ाम कों पतरस कर रहा हैं और प्राचीनों कों भी यही सलाह दें रहा हैं की लोगों कों अनदेखा न करों परन्तु उनकी रखवाली करों जैसा एक चरवहा करता हैं। क्या आप जानते हैं की पुराने समय मे इजराइल मे अधिकतर लोग भेड़ो कों पालते थे इजराइल कों उस समय चारवाहो का देश भी कहा जाता था। चरवाहों और भेड़ो के बीच एक ख़ास रिश्ता होता हैं। भेड़े अपने चरवाहे की बातों कों भली भांति समझती हैं। वह उसकी आवाज़ कों अच्छी तरह पहचानती हैं। और चरवाहा भी अपनी भेड़ो कों अच्छे से पहचानता हैं। वह उनके लिए अपने प्राणो कों जोखिम मे डालता हैं। और उनकी रखवाली करता हैं। वह अपनी भेड़ो कों कभी भी भटकने के लिए नहीं छोड़ता परन्तु उनके लिए हमेशा जागर्त रहता हैं।
पतरस प्राचीनों कों भी यही सलाह देता हैं की तुम भी चरवाहो की तरह उन लोगों की देखभाल करों जो तुम्हरे मध्य मे हैं। हालांकि यह शिक्षा पतरस नें यीशु से ही पाई हैं। यीशु भी भीड़ कों देखकर तरस करते थे क्यूंकि वह आप एक चरवाहे थे उन्होंने कहा अच्छा चरवाहा मै हूँ ( यूहन्ना 10:11, 14-15) यीशु उस रिश्ते के विषय मे बताते है जो भेड़ो और चरवाहे के बीच मे होता हैं।
पतरस कलीसिया के प्राचीनों और नवयुवकों के बीच मे उसी रिश्ते की मज़बूती कों बना रहा हैं। लेकिन क्या यह रिश्ता इतनी आसानी से बन सकता हैं?? शायद नहीं क्यूंकि प्राचीनों कों इसके लिए अपने आप से संघर्ष करना होगा और उनको अपने जीवन मे कुछ क़ामो कों करना होगा। जैसे आप यह किसी दवाब मे न करें, बल्कि परमेश्वर की इच्छस से और आनंद से करें। नीच कमाई से नहीं परन्तु मन लगाकर करें। लोगों के ऊपर अधिकार नहीं जाताना परन्तु आदर्श बनना। इन सब बातों का ध्यान आपको रखना हैं क्यूंकि यही आज्ञा हैं ( मत्ती 20: 25-28 ) आप जिस दौड़ मे दौड़ रहे हो उसमे आपको प्रधान नहीं परन्तु सेवक बनना हैं क्यूंकि आप इसलिए बुलाये गए हो। ऐसा यीशु नें सिर्फ कहा नहीं परन्तु किया भी। और वो हमें एक ऐसा आदर्श दें गया की हम ऐसे ही कामों कों करें।
क्यूंकि बहुत सी बार जब हम उम्र मे बढ़ने लगते हैं तो हम ऐसा विचार करने लगते हैं की हम अब एक अधिकारी पद के हकदार हैं। लोगों कों हमारी सुननी चाहिए और हमारी आज्ञा का पालन होना चाहिए। मै उम्र मे बड़ा हुँ तो मै विलासिता की वस्तुओं का पहला अधिकारी हुँ। हम बहुत सी बार ऐसा विचार करते हैं। लेकिन यीशु बिलकुल इसके विपरीत बाते करते हैं। आप कों चाहिए की आप लोगों की सेवा करें। आप लोगों का ध्यान रखे और उनके लिए कार्य करें। उनको ऐसा वातावरण दें की वह सहज महसूस करें।
पतरस 5:3 मे साफ रीति से कहता हैं की जो लोग तुम्हे सौंपे गए हैं उन पर अधिकार मत जताओं परन्तु उन के लिए कार्य करें एक आदर्श बने जैसा यीशु नें किया वैसा ही आदर्श बने। और आगे वचन 4 मे कहता हैं की जो प्राचीन एक सेविकाई का जीवन जीते हैं जैसा यीशु नें किया और तुम्हे करने कों भी कहा। अगर आप ऐसा करते हैं तो वह आप कों जब वह अपनी महिमा मे आएगा यानी जब वह न्याय के दिन प्रकट होगा तो वह तुम्हे महिमा का मुकुट देगा। याकूब 1:12 कहता हैं की वह धन्य हैं जो परीक्षा मे स्थिर हैं क्यूंकि वह जीवन का मुकुट पायेगा। और वो जीवन का मुकुट प्रधान चारवाह देगा अर्थार्त हमारा प्रभु यीशु। आमीन।
प्राचीनों के बिलकुल अलग शिक्षा देती हैं बाइबिल क्यूंकि सांसारिक ज्ञान और दूसरे समाजो मे जो प्राचीन होते हैं वह अधिकारियो की तरह रहते हैं। लेकिन बाइबिल प्राचीनों कों सलाह देती हैं की तुम सेवक बनो जैसा यीशु था वैसा ही बनों। प्राचीनों कों सलाह देने के बाद पतरस नवयुवको कों भी सलाह देता हैं की प्राचीनों के अधिकारी बनों और एक दूसरे की सेवा करों। नवयुवकों कों सलाह देता हैं अपनी जवानी के दिनों मे अभिमानी न होना न ही ठठा करने वाला होना। परन्तु प्राचीनों के अधीन और सेवा करने वाले होना। बहुत सी बार जवानो कों देखा जाता हैं की वह सब से दूर अपनी ही उम्र के लोगों के साथ रहते हैं। अपनी मनमानी के अनुसार क़ाम करते हैं। बड़ो की बातों कों सुनते ही नहीं हैं। और जब सुनते हैं तो हसीं मे टाल देते हैं। कभी भी गंभीरता से लेते हैं नहीं। पुराने जमाने का बोल कर झिड़क भी देते हैं। परन्तु सावधान क्यूंकि परमेश्वर तुम्हे देख रहा हैं। सभोपदेशक 11:9 कहता हैं की है जवानो अपने आप कों सम्भालो क्यूंकि इन सब के बाद तुम्हारा न्याय हैं।
पतरस सलाह देते हैं की परमेश्वर के ब्लवंत हाथों के नीचे रहो जिससे वह तुम्हे बढ़ाए।हालांकि जवानो और प्राचीनों दोनों कों जरूरत हैं की परमेश्वर की नज़दीकी मे और उसके हाथों के नीचे रहे। क्यूंकि जब हम परमेश्वर की नज़दीकी मे रहते हैं तो वह हमारा मार्गदर्शन करते हैं। इसलिए चाहिए की प्राचीन और जवान दोनों ही परमेश्वर के अनुग्रह मे बने रहे जिससे परमेश्वर दोनों कों बढ़ाये। परन्तु वचन जवानों पर ज्यादा ज़ोर डालकर कहता हैं की परमेश्वर के हाथों के नीचे रहे। इसका कारण क्यूंकि प्राचीनों कों तो एक अच्छा अनुभव हो जाता हैं अपने जीवन मे की परमेश्वर की नज़दीकी मे रहना क्यों जरूरी हैं। लेकिन जवानो के पास अनुभव की कमी होने के कारण। पतरस जवानों कों सलाह देता हैं परमेश्वर की नज़दीकी मे रहो। क्यूंकि जब आप परमेश्वर के बाड़े से बाहर आ जाते हैं। जब आप उसके बलवंत हाथों के नीचे से निकल जाते हैं तब शैतान कों अच्छा मौका मिल जाता हैं की वह आपको पकड़ ले। शैतान हमेशा ताक मे रहता हैं की किसको पकड़े किसको फाड़े। शैतान हमेशा आपको देखता रहता हैं की कब आप मण्डली से भटके की कब आप उनके बलवंत हाथों से निकले और वो आपको पकड़े।
कभी आपने शेर कों शिकार करते देखा हैं?? वो बहुत देर तक एक झुंड पर नज़र रखता हैं। और इंतजार करता हैं की कब कोई गलती करें। और वो गलती क्या हैं?? की कौन कब झुंड से अलग हो। शेर दो ही तरह से शिकार करता हैं। एक उसे पकड़ता हैं जो झुंड से अलग हो जाए दूसरा झुंड मे छोटे बच्चो कों। इसलिए जरूरी हैं की मसीह झुंड मे बने रहे और जो विश्वास मे कमजोर हैं और जो जवान हैं उन्हें संभाले। और जवानो कों ख़ास तरह से पतरस समझा रहा हैं की प्राचीनों के अधीन रहो परमेश्वर के नज़दीक रहो। विश्वास मे मजबूत हो जाओ।
जब हम सभी इन शिक्षाओं कों मानकर ऐसा ही करते हैं तब परमेश्वर हमें अपने वादे के अनुसार बढ़ाता हैं। हम सभी कों चाहिए की परमेश्वर की शिक्षा कों सुने और उन्हें माने। अगर हम ऐसा करते हैं तो परमेश्वर हमें आत्मिकता मे बढ़ाने के लिए विश्वासयोग्य हैं। मै ऐसी आशा रखता हुँ की आज का संदेश आप लोगों कों और ज्यादा मसीह मे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा। और उस पत्थर कों तोड़ने की कोशिश करेगा जो प्राचीनों और नवयुवकों के बीच मे होता हैं। आइये सारा आदर और महिमा परमेश्वर कों देते हैं और प्रार्थना करते हैं की परमेश्वर हम सभी कों संभाले और आत्मिकता मे बढ़ाए।
आमीन।
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